भारतीय ज्ञान परंपरा में संत साहित्य का योगदान
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https://doi.org/10.32628/IJSRHSS25228Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा एक व्यापक और समृद्ध परंपरा है, जो वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों, शास्त्रों और लोक साहित्य के माध्यम से विकसित हुई है। यह परंपरा केवल दार्शनिक और आध्यात्मिक चिंतन तक सीमित नहीं रही अपितु समाज को नैतिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध करने में भी सहायक रही है। इस ज्ञान परंपरा को संत साहित्य ने जनसामान्य तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन के दौरान संत कवियों ने ज्ञान, भक्ति और सामाजिक सुधार को केंद्र में रखकर साहित्य की रचना की। कबीर, तुलसीदास, मीराबाई, रैदास, गुरु नानक, नामदेव, सेना, पिपा, धन्ना जैसे संतों ने लोकभाषा में अपनी रचनाएँ लिखि, जिससे ज्ञान केवल विद्वानों तक सीमित न रहकर साधारण जनमानस तक पहुँचा। संत साहित्य ने जाति-पाँति, धार्मिक पाखंड, आडम्बर और सामाजिक विषमताओं पर प्रहार किया तथा प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। आधुनिक समय में भी संत साहित्य की शिक्षाएँ प्रासंगिक बनी हुई हैं। यह सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने में सहायक है। इस शोध पत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा और संत साहित्य के योगदान का विश्लेषण किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संत साहित्य ने न केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाई अपितु सामाजिक और बौद्धिक क्रांति में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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References
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